छत्तीसगढ़

भालू के हमले से महिला गंभीर घायल, जंगल में सुरक्षा की कमी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

Shantanu Roy
9 Sept 2025 9:55 PM IST
भालू के हमले से महिला गंभीर घायल, जंगल में सुरक्षा की कमी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
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Khairagarh. खैरागढ़। जिले के बकरकट्टा जंगल में मंगलवार दोपहर एक महिला पर भालू और उसके दो शावकों ने अचानक हमला कर दिया। इस घटना में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे ग्रामीणों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है और वन विभाग की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, संझारी गांव की 40 वर्षीय सुरजौतीन बाई रोज की तरह लकड़ी लेने जंगल गई थीं। दोपहर करीब 2 बजे, जब वे गाताभरी-बकरकट्टा क्षेत्र की झाड़ियों में लकड़ी
एकत्र
कर रही थीं, तभी एक भालू और उसके दो शावक झाड़ियों से निकल कर उन पर टूट पड़े। भालू ने उन्हें सिर, हाथ और पैरों पर गंभीर चोटें पहुँचाईं। महिला की चीख सुनकर पास में लकड़ी काट रहे ग्रामीण दौड़े और अपनी जान जोखिम में डालकर भालू को खदेड़ा। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायल महिला को पहले बकरकट्टा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहाँ उनकी हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उन्हें छुईखदान अस्पताल रेफर कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई isolated घटना नहीं है। बकरकट्टा और आसपास के जंगलों में भालू समेत अन्य जंगली जानवरों की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं। उनका आरोप है कि वन विभाग की गश्त कागजी है और सुरक्षा के नाम पर कोई ठोस इंतज़ाम नहीं किए जा रहे। उनका कहना है कि यदि समय रहते जंगलों में निगरानी और सुरक्षा उपाय लागू किए गए होते तो ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता था। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि खेतों के आसपास पड़ा कचरा, खुले में रखा अनाज और जंगलों में भोजन की कमी जंगली जानवरों को गांवों की ओर आकर्षित कर रही है। लोग डर के कारण जंगल से लकड़ी और अन्य आवश्यक सामान लाने में असहज महसूस कर रहे हैं। कई बार उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही जंगल कटाई और मानव हस्तक्षेप से भालू जैसे जंगली जानवर अपने प्राकृतिक आवास से बाहर आ रहे हैं। भोजन और सुरक्षित क्षेत्र की तलाश में वे गांवों तक पहुँच रहे हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे हमलों की घटनाएँ बढ़ी हैं। साथ ही, खुले में रखा अनाज और कचरा इनके लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो रही है। वन विभाग की ओर से अब तक न तो चेतावनी प्रणाली लागू की गई है और न ही त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली टीम बनाई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर सतर्कता बरती जाती तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था। कई बार स्थानीय प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से माँग की है कि बकरकट्टा सहित जिले के अन्य वनांचल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त की जाए। जंगलों में गश्त बढ़ाई जाए, ग्रामीणों को जागरूक किया जाए और जंगली जानवरों से निपटने के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया दल बनाया जाए। साथ ही, जंगलों के कटाव को रोकने और प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए योजनाएँ लागू की जाएँ। स्थानीय समाज ने इस घटना को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि यदि जल्द ही सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो ऐसी घटनाएँ और बढ़ सकती हैं। सुरजौतीन बाई जैसे कई ग्रामीण रोजाना जान का जोखिम उठाकर जंगलों में जाते हैं, जबकि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा और सहायता नहीं मिल रही। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक ठोस कदम उठाता है। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में भालुओं के आतंक को लेकर भय का माहौल बना हुआ है और ग्रामीण सुरक्षा के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं। यह मामला न केवल जंगली जानवरों से सुरक्षा का, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मानव-वन्यजीव संतुलन का भी है।
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